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भोपाल में विदेशी शराब की कीमतों में 40% तक गिरावट, भारतीय कंपनियों की बढ़ी चिंता

भोपाल। भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत आयात शुल्क में कटौती का असर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के शराब बाजार पर दिखाई देने लगा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शहर में कुछ चुनिंदा आयातित शराब ब्रांडों की कीमतों में 15 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। इससे घरेलू शराब निर्माताओं की चिंता बढ़ गई है। भारतीय कंपनियों को आशंका है कि विदेशी शराब सस्ती होने से राज्य में प्रीमियम इंडियन-मेड फॉरेन लिकर (IMFL) और वाइन की बिक्री प्रभावित हो सकती है।
घरेलू शराब निर्माताओं के प्रमुख संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC) ने मध्य प्रदेश सरकार से आबकारी नीति की समीक्षा करने का आग्रह किया है। संगठन का कहना है कि वह विदेशी शराब के आयात पर प्रतिबंध लगाने या संरक्षणवादी नीति अपनाने की मांग नहीं कर रहा है। उसकी प्रमुख मांग यह है कि भारतीय उत्पादकों को भी विदेशी कंपनियों के समान प्रतिस्पर्धी अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
विदेशी शराब की कीमतों में 15 से 40 प्रतिशत तक कमी
भोपाल में चुनिंदा आयातित शराब ब्रांडों की कीमतों में आई गिरावट को भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते के तहत शुल्क कटौती से जोड़कर देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, कुछ विदेशी ब्रांड अब पहले की तुलना में 15 से 40 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध हो रहे हैं।
हालांकि, किन ब्रांडों की कीमतों में कितनी कमी हुई है, इसकी विस्तृत सूची उपलब्ध नहीं है।
साथ ही सभी आयातित शराब उत्पादों की कीमतें समान अनुपात में कम हुई हैं, ऐसा दावा भी नहीं किया जा सकता।
लेकिन चुनिंदा ब्रांडों की कीमतों में बड़ी गिरावट ने घरेलू शराब उद्योग के सामने प्रतिस्पर्धा से जुड़ी नई चुनौती खड़ी कर दी है।
भारतीय शराब निर्माताओं की बढ़ी चिंता
घरेलू शराब कंपनियों को आशंका है कि विदेशी उत्पाद सस्ते होने से प्रीमियम श्रेणी में भारतीय ब्रांडों की बाजार हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।
विशेष रूप से प्रीमियम इंडियन-मेड फॉरेन लिकर और वाइन बनाने वाली कंपनियों के सामने कीमतों की प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है।
भारतीय कंपनियां गुणवत्ता सुधारने, उत्पादन तकनीक विकसित करने और स्थानीय आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने में निवेश करती हैं।
उद्योग का तर्क है कि यदि विदेशी उत्पादों को शुल्क में राहत मिलती है, तो घरेलू कंपनियों के लिए भी कर और शुल्क संबंधी व्यवस्था संतुलित होनी चाहिए।
CIABC ने उठाया समान अवसर का मुद्दा
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उद्योग विदेशी उत्पादों के आयात पर रोक नहीं चाहता।
संगठन का कहना है कि बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहनी चाहिए।
लेकिन ऐसी व्यवस्था भी जरूरी है, जिसमें भारतीय निर्माताओं को नुकसानदेह परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
CIABC ने मध्य प्रदेश सरकार से राज्य की आबकारी नीति की समीक्षा करने का आग्रह किया है।
संगठन चाहता है कि घरेलू और आयातित उत्पादों पर लागू शुल्क तथा अन्य नियमों का मूल्यांकन किया जाए।
आबकारी नीति की समीक्षा की मांग
मध्य प्रदेश में शराब की बिक्री और उससे संबंधित शुल्क व्यवस्था राज्य की आबकारी नीति के तहत संचालित होती है।
इस नीति का असर उत्पादों की खुदरा कीमतों और बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धी स्थिति पर पड़ सकता है।
घरेलू उद्योग का कहना है कि आयात शुल्क में बदलाव के बाद राज्य स्तर पर लागू शुल्क संरचना की समीक्षा जरूरी हो गई है।
हालांकि, CIABC ने किन विशिष्ट करों या शुल्कों में बदलाव की मांग की है, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
संगठन की मांग मुख्य रूप से समान प्रतिस्पर्धी अवसर सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
प्रीमियम IMFL और वाइन बाजार पर असर की आशंका
विदेशी शराब की कीमतों में कमी का सबसे अधिक असर प्रीमियम श्रेणी में पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस श्रेणी में घरेलू और आयातित उत्पादों के बीच प्रतिस्पर्धा रहती है।
यदि किसी विदेशी ब्रांड की कीमत घरेलू प्रीमियम उत्पाद के करीब पहुंचती है, तो बाजार में ग्राहकों के विकल्प बदल सकते हैं।
हालांकि, वास्तविक बिक्री पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय के बाजार आंकड़ों से ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल घरेलू निर्माताओं की चिंता संभावित कारोबारी नुकसान को लेकर है।
स्थानीय सप्लाई चेन में भारतीय कंपनियों का निवेश
CIABC ने घरेलू कंपनियों की ओर से गुणवत्ता, तकनीक और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में किए जाने वाले निवेश का भी उल्लेख किया है।
शराब निर्माण उद्योग से पैकेजिंग, परिवहन, भंडारण और अन्य संबंधित कारोबारी गतिविधियां जुड़ी होती हैं।
इन गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसर पैदा होते हैं।
घरेलू उत्पादकों का कहना है कि उनके निवेश और उत्पादन संबंधी लागत को ध्यान में रखते हुए नीति बनाई जानी चाहिए।
हालांकि, मध्य प्रदेश में इस उद्योग से जुड़े रोजगार या निवेश के विशिष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
मुक्त व्यापार समझौते का बाजार पर प्रभाव
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना और निर्धारित उत्पादों पर व्यापारिक बाधाएं कम करना है।
ऐसे समझौतों के तहत आयात शुल्क में बदलाव से संबंधित उत्पादों की लागत प्रभावित हो सकती है।
लेकिन किसी उत्पाद की अंतिम खुदरा कीमत केवल आयात शुल्क पर निर्भर नहीं करती।
इसमें राज्य स्तर के कर, वितरण लागत और अन्य शुल्क भी भूमिका निभा सकते हैं।
यही कारण है कि घरेलू उद्योग अब राज्य की आबकारी नीति पर ध्यान देने की मांग कर रहा है।
आयात पर प्रतिबंध नहीं चाहता घरेलू उद्योग
CIABC ने अपने रुख में स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य विदेशी कंपनियों को भारतीय बाजार से बाहर रखना नहीं है।
संगठन का कहना है कि वह संरक्षणवाद के बजाय निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा चाहता है।
इसका अर्थ है कि घरेलू कंपनियों को भी ऐसी नीतिगत परिस्थितियां मिलें, जिनमें वे गुणवत्ता और कीमत के आधार पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
उद्योग के अनुसार, संतुलित नीति से विदेशी और भारतीय दोनों प्रकार के उत्पादकों के लिए स्पष्ट कारोबारी व्यवस्था बन सकती है।
सरकार के फैसले पर रहेगी नजर
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से CIABC की मांग पर किसी नई आबकारी नीति या शुल्क संशोधन की घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेगी।
राज्य सरकार को आबकारी राजस्व, बाजार की प्रतिस्पर्धा और घरेलू उद्योग की चिंताओं जैसे विभिन्न पहलुओं पर विचार करना पड़ सकता है।
यदि नीति की समीक्षा की जाती है, तो उसके निष्कर्षों का असर राज्य के शराब बाजार पर पड़ सकता है।
घरेलू और विदेशी ब्रांडों में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
भोपाल में चुनिंदा आयातित शराब ब्रांडों की कीमतों में 15 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट ने घरेलू निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।
भारतीय कंपनियों को आशंका है कि इससे प्रीमियम IMFL और वाइन बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धी स्थिति कमजोर हो सकती है।
CIABC ने इसी कारण मध्य प्रदेश सरकार से आबकारी नीति की समीक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार घरेलू उद्योग की चिंताओं पर क्या रुख अपनाती है और बाजार में कीमतों के बदलाव का वास्तविक असर कितना होता है।





